हम अपने पैरों को थपथपाते हैं । हम अपनी सीट पर झूमते हैं। हम डांस फ़्लोर पर थिरकते हैं । बीट पर थिरकने से हमारे दिमाग के वे हिस्से एक्टिव हो जाते हैं जो बातचीत और मूवमेंट को प्रोसेस करते हैं । इसी वजह से कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि रिदम की हमारी समझ असल में बातचीत करने की क्षमता का ही एक फ़ायदा है । दूसरे रिसर्चर का मानना है कि इंसानों ने डांस करने की क्षमता इसलिए विकसित की ताकि हमारे सामाजिक रिश्ते मज़बूत हों, जिससे हमें साथ मिलकर काम करने और एक प्रजाति के तौर पर आगे बढ़ने में मदद मिली । आख़िरकार, इतिहास में हर संस्कृति ने किसी न किसी तरह का म्यूज़िक विकसित किया है। लेकिन चाहे आपको लगे कि आप डांस कर सकते हैं या नहीं, हम सभी में रिदम की समझ होती है । एक स्टडी से पता चलता है कि यह खूबी हमें जन्म से ही मिलती है ।